स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय | Swami Vivekananda Biography in Hindi

 स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय Swami Vivekananda Hindi Biography

 आज इस आर्टिकल की मदद से हम Swami Vivekananda के जीवन को समझने का प्रयत्न करेंगे| वो मात्र ऐसे महापुरुष हैं जिन्हें पूरा संसार आदर्श मानता है और मानती रहेगी| Swami Vivekananda Hindi Biography Story-बहुत महान-महान व्यक्तियों ने इनसे प्रेरणा लेकर, अपने जीवन में, चमक डाली है| 

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चाहे वो नेता जी यानि सुभाष चन्द्र बोस हों, या फिर वो लाल बहादुर शास्त्री जी हों, चाहे वो हमारे प्रधानमंत्री 2020 नरेन्द्र भाई मोदी हों, या राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी हों, 21 सदी के सबसे जिनिअस वैज्ञानिक एलन मस्क हो, बहुत लम्बी कतार है|हर किसी ने Swami Vivekananda प्रेरणा ली है|
 
ये पहले इंसान थे, जो हमारे वेदों की ताकत, हमारे उपनिषदों की शक्ति को, पूरी दुनिया में फैला दिया और झुका दिया| पूरी दुनिया में, भारत के झंडे का सम्मान बढ़ा देने वाले, स्वामी विवेकानंद ने भारत के अध्यात्मिक उत्थान के लिए अपने छोटे से जीवन काल में बहुत कार्य किया|

19 वीं सदी के महाज्ञानी, श्री रामकृष्ण परमहंस के चेले एवं भारत के साहित्य और संस्कृति के महत्व को, देश विदेश में समझाने वाले, स्वामी विवेकानंद 

ने, सम्पूर्ण विश्व में हिन्दू धर्म के महत्व को बताया| 

स्वामी विवेकानंद ने गरीबों की सेवा और कल्याण के लिए ‘रामकृष्ण मिशन‘ को स्थापित किया| उन्होंने देश के नौजवानों को, प्रगति करने के लिए नए  जोश और उत्साह भर दिया|
 
साल 1984 में भारत सरकार ने स्वामी जी के जन्मदिवस यानि 12 जनवरी को National Youth Day राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा कर दिया था|
 
और तब से पूरा देश 12 जनवरी यानि उनके जन्मदिन को नेशनल यूथ डे के रूप में मनाता आ रहा है|

Swami Vivekananda Hindi Biography Story

 देखिये लेख में, कुछ लिखने से पहले हम आपसे आग्रह करना चाहेंगे की ये आपकी नैतिक जिम्मेवारी है की इस लेख को सभी पाठक अधिक से अधिक लोगों के बीच, जरुर शेयर करेंगे|

स्वामी विवेकानंद का बचपन और जन्म कथा Swami Vivekananda Biography in Hindi

स्वामी विवेकानंद का जन्म कब और कहाँ हुआ

सर्वप्रथम Swami Vivekananda जी के बचपन के बारे में जानते हैं, इनकी जो माँ थी, भुनेश्वरी देवी, उन्होंने भगवान शंकर से प्रार्थना की- भगवान शिव शंकर मुझे, आप एक प्यारा सा बेटा दे दीजिये| 
 
शंकर भगवान इनकी माताजी के स्वप्न में, भुवनेश्वरी देवी को दर्शन देते हैं और उनसे कहते हैं परेशान मत होना, आ रहा हूँ, मैं! 
 
एक महापुरुष का जन्म होता है, 12 जनवरी 1863 को, सोमवार की सुबह, मकरसंक्रांति के दिन, सूर्योदय से ठीक पहले 6:33 AM बजे, हिंदुस्तान के कलकत्ता शहर में! उस समय भारत देश में, अंग्रेज शासन किया करते थे|
 

नरेन्द्र नाथ दत्त का पारिवारिक परिचय-Swami Vivekananda Hindi Biography 

 
पश्चिमबंगाल की, बंगाल परम्परा में विश्वास रखने वाले, एक बंगाली फैमिली में स्वामी विवेकानंद का जन्म होता है| इनके घर वालों ने बचपन में इनका नाम नरेन्द्र नाथ दत्त रखा और ये कुल 9 भाई बहन थे| 

माता भुवनेश्वरी देवी और पिता विश्वनाथ दत्त 

 
इनके पिता जी, विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट में, एक अधिवक्ता यानि अटोर्नी थे और स्ट्रिक्ट भी थे इनको लेकर, इनकी माता जी भुवनेश्वरी देवी, एक धर्मपरायण गृहिणी थी| नरेन्द्र के दादाजी, फारसी और संस्कृत भाषा के, एक अच्छे विद्वान व्यक्ति थे|  

स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन (Swami Vivekananda Hindi Biography)

बचपन से ही धार्मिक और जिज्ञासु स्वभाव 

Swami Vivekananda के बचपन से ही, इनके घर में धार्मिक ग्रंथो रामायण, महाभारत का प्रभाव, बहुत ज्यादा था और बचपन से ही स्वामी विवेकानंद, भगवान से जुड़ने लगे थे और तो और ध्यान और समाधि में बैठने का काम, उन्होंने बहुत ही, कम उम्र से ही, शुरू कर दिया था| 

स्वामी जी भगवान राम से, बहुत प्रेरित थे| महाभारत, रामायण जैसे पवित्र ग्रंथो की कहानियाँ इनके दिमाग में घर कर गई थीं| बचपन से ही स्वामी जी भगवान के सम्बन्ध में जानने के लिए बड़े जिज्ञासु थे|

समाज और जातिवाद पर प्रश्न (Swami Vivekananda Hindi Biography Story)

और उस समय समाज में व्याप्त विभिन्न प्रकार के रीति रिवाजों, मान्यताओं और जातिवाद के बारे में, कठोर सवाल किया करते थे 

सन्यासियों के प्रति करुणा और सेवा भाव

विवेकानंद जी बचपन में बहुत नटखट किस्म के बालक थे| और लोगों का बहुत मजाक भी बनाया करते थे| स्वामी विवेकानंद बहुत कोमल दिल के स्वामी थे| बाल्यकाल से ही नरेन्द्र के मन में, सन्यासियों के प्रति बहुत श्रद्धा थी|

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा (Education) Swami Vivekananda Hindi Biography Story

एक घटना है, Swami Vivekananda का दिल इतना अच्छा था की ये कहीं भी अगर किसी साधू सन्यासी को देख लेते थे तो ये सब कुछ दे देते थे! पैसा है, ले जाओ!  खाना है, ले जाओ| 

ये देखकर, इनके माता-पिता ने इन्हें, कमरे में बंद कर दिया और कहा इसे बंद करो इससे पहले ये सबकुछ लुटा न दे हमारा बेटा|बंद कमरे की खिड़की से उन्हें जो कोई मार्ग में आते जाते दिख जाता उसको खिड़की से सारा सामान उठा उठा के, दे दिया करते थे| ये लो ! ये लो ! तुम ले जाओ ! ये सब!

स्वामी विवेकानंद पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी अव्वल थे| उन्होंने संगीत में, गायन और वाद्य यंत्रो को बजाने की, शिक्षा ग्रहण की थी| 

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर स्कूल 

स्वामी विवेकानंद की प्रारंभिक शिक्षा ईश्वर चंद्र विद्यासागर द्वारा स्थापित विद्यालय में हुई, जहाँ उन्होंने अनुशासन और नैतिकता सीखी।स्वामी विवेकानंद जब आठ साल के हुए, सन 1871 में, तब इनकी स्कूली पढ़ाई के लिए, इनका ईश्वर चन्द्र विद्यासागर मेट्रोपोलिटन संस्थान स्कूल में, एडमिशन करवा दिया गया|
 
और यहाँ पर उन्होंने अपनी, शुरुवात की छः साल की, शिक्षा ग्रहण की 1877 तक और फिर साल 1877 से साल  1879  तक दो साल, स्वामी विवेकानंद, अपने परिवार के साथ, कलकत्ता छोड़कर, रायपुर में रहे| 

प्रेसिडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज

 
लेकिन जब दो साल बाद फिर से इनका परिवार, कलकत्ता वापस लौट आया, तो 1979 में इन्होने अपनी मीट्रिक की परीक्षा पास की और प्रेसिडेंसी कॉलेज की प्रवेश परीक्षा में, एकमात्र छात्र बने, जिसने सर्वोच्च अंक प्राप्त किया| उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज की प्रवेश परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बाद में स्कॉटिश चर्च कॉलेज से दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया।
 

पश्चिमी दर्शन और तर्कशास्त्र का अध्ययन (Swami Vivekananda Hindi Biography Story)

 
एक साल बाद Swami Vivekananda ने कलकत्ता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज में प्रवेश लिया और फिलोसफी पढना आरम्भ किया, यहाँ उन्होंने पश्चिमी तर्क, पश्चिमी फिलोसफी और यूरोपीय देशों के इतिहास के बारे में, ज्ञानार्जन किया| यहाँ उन्होंने पश्चिमी दर्शन, इतिहास और तर्कशास्त्र का गहन अध्ययन किया, जिससे उनकी विचारधारा और भी व्यापक बनी।

रामकृष्ण परमहंस से मुलाकात Swami Vivekananda Hindi Biography Story

साल 1881 में स्वामी विवेकानंद जी की भेंट रामकृष्ण परमहंस से हुई| श्री रामकृष्ण परमहंस, माँ काली के बहुत बड़े उपासक हुआ करते थे| 
 
साल 1884 में, नरेन्द्र नाथ ने अपनी स्नातक की शिक्षा, कला वर्ग में पूरी की| विवेकानंद की बेहद ही गजब और आश्चर्यजनक याददाश्त की वजह से लोग श्रुतिधर (विलक्षण स्मरण शक्ति वाला व्यक्तित्व) भी कहते थे|
 
स्वामी विवेकानंद का ज्ञान, बीतते दिनों के साथ, तेज़ी से बढ़ ही रहा था, साथ ही उनके तर्क भी अत्यन्त प्रभावी, होते जा रहे थे| उनके मन में परमेश्वर के अस्तित्व की बात और भी गहरी होती जा रही थी, और इसी ने उन्हें ब्रह्म समाज से जोड़ा| 
 
परन्तु उनके प्रार्थनाओं के तरीके और भजन आदि में, निहित सार भी उनकी ईश्वर के प्रति, जिज्ञासा को शांत नहीं कर पाया| विवेकानंद एक बड़े स्वप्न द्रष्टा थे|
 

पहली मुलाकात और ईश्वर पर प्रश्न

 
सन 1881 में स्वामी रामकृष्ण परमहंस से, अपनी पहली मुलाकात के दौरान ही, अपनी आदत और जिज्ञासु स्वाभाव के कारण, उन्होंने रामकृष्ण परमहंस से भी पूछ लिया-  क्या उन्होंने ईश्वर को देखा है? 
 
तो रामकृष्ण परमहंस ने जवाब दिया की, हाँ मैंने ईश्वर को देखा है और बिल्कुल उसी तरह, जिस तरह तुमको देख पा रहा हूँ!
 
नरेन्द्र यानि Swami Vivekananda को इस तरह का जवाब देने वाले प्रथम व्यक्ति रामकृष्ण परमहंस ही थे और नरेन्द्र उनकी बातों की सत्यता को, अनुभव भी कर पा रहे थे| 
 
और अब तक वो पहली बार, किसी मानव रूप से इतना अधिक प्रभावित हुए थे| इसके बाद उन्होंने रामकृष्ण परमहंस से कई दफा मुलाकातें की|

रामकृष्ण परमहंस को स्वामी जी ने अपना गुरु बना लिया 

अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने में सक्षम इस इंसान यानि परमहंस को, उन्होंने अपना गुरु मान लिया|
 
गुरु के निर्वाण के बाद की भूमिका
 
सिर्फ पांच साल के बाद 1886 में, स्वामी श्री रामकृष्ण परमहंस ने अपने शरीर का त्याग कर दिया और पंचतत्व में विलीन हो गए| स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने, अपनी मृत्यु दर्शन के पहले ही, नरेन्द्र नाथ दत्त को अपना उत्तराधिकारी बना चुके थे|

स्वामी विवेकानंद की संन्यास यात्रा Swami Vivekananda Hindi Biography Story

भारत भ्रमण और अनुभव

स्वामी विवेकानंद की यात्रा की शुरुवात – और साल 1890 में Swami Vivekananda ने लम्बी-लम्बी यात्राएं करनी शुरू कर दी, उन्होंने लगभग पूरे देश में यात्रा की| 

गरीबों और समाज की वास्तविक स्थिति

अब तक Swami Vivekananda वेदादि के प्रख्यात विद्वान और एक नौजवान धार्मिक गुरु बन चुके थे|इन यात्राओं के दौरान वो राजाओं के महल में भी रुके और गरीबों की कुटिया में भी| 
 
इससे उन्हें भारत के अलग अलग स्थानों और वहाँ निवासियों के सम्बन्ध में काफी महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली| 
 
उन्हें समाज में जाति पाति के नाम पर फैली तानाशाही की जानकारी मिली| सबसे अंततः उन्हें यह समझ आया की, यदि उन्हें एक विकसित भारत का निर्माण करना है तो उन्हें इन बुराईयों को ख़तम करना होगा|
 

विवेकानंद नाम कैसे पड़ा 9Swami Vivekananda Hindi Biography Story)

अपने सफ़र के बीच, वो वाराणसी, अयोध्या, आगरा, वृन्दावन और अलवर आदि स्थानों पर गए और इसी दौरान उनको नाम मिला स्वामी विवेकानंद| खेत्री के महाराजा ने उन्हें “विवेकानंद” नाम दिया, जिसका अर्थ है विवेक और आनंद से युक्त।

स्वामी विवेकानंद की शिकागो यात्रा 

अपनी यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद के साथ उनकी कुछ किताबें हमेशा रही जिसमे श्रीमदभगवत गीता भी थी| इस भ्रमण के दौरान उन्होंने भिक्षा भी मांगी|
 

विश्व धर्म सम्मेलन का ऐतिहासिक भाषण

 
सन 1893 में Swami Vivekananda, अमेरिका के शिकागो शहर पहुंचे, यहाँ सम्पूर्ण विश्व के धर्मो का सम्मलेन आयोजित किया गया था| इस सम्मलेन में, एक विशेष जगह पर, हर धर्म के धर्म प्रतिनिधियों ने अपने धर्म की किताब रख रखी थीं| 
 
उसी स्थान पर, हमारे देश के धर्म के व्याख्या के लिए, श्रीमदभगवत गीता की एक छोटी किताब रखी गई थी, जिसका कुछ लोग उपहास भी कर रहे थे|
 
परन्तु जैसे ही Swami Vivekananda के भाषण देने का नंबर आया और उन्होंने अपना भाषण देना आरम्भ किया, और तुरंत ही सारा हाल तालियों की गडगडाहट से गूँज पड़ा, क्योंकि स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण के शुरू में ही जो शब्द बोले-  मेरे अमेरिकी भाईयों और बहनों
 
इसके बाद, उनके द्वारा किये गए अपने धर्म के वर्णन से भी, वहां मौजूद लोग अभिभूत हो गए और हमारी धार्मिक किताब श्रीमदभगवत गीता का सभी ने लोहा माना|

भारत और वेदांत का वैश्विक सम्मान

 
Swami Vivekananda ने लगभग दो सालों तक, पूर्व एवं मध्य यूनाइटेड स्टेट्स में लेक्चर देने में व्यतीत किये, जिनमे मुख्य रूप से शिकागो, न्यू यॉर्क, डेटराइड और बोस्टन शामिल है| 
 

वेदांत सोसाइटी और रामकृष्ण मिशन(Swami Vivekananda Hindi Biography Story)

वेदांत सोसाइटी की स्थापना 

वर्ष 1894 में न्यूयॉर्क में, स्वामी विवेकानंद ने वेदांत सोसाइटी को स्थापित किया और अगले साल यानि वर्ष 1895 तक, उनके बेहद ही व्यस्त कार्यक्रमों के कारण उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही थी और इसका सीधा प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ने लगा था इसलिए अब उन्होंने अपने लेक्चर यात्रा को अभी विराम, देने का निर्णय ले लिया और वेदान्त और योग पर आधारित, छोटी कक्षाओं को शिक्षा देने लगे| 
 

सिस्टर निवेदिता से मुलाकात

 इस साल के नवम्बर महीने में Swami Vivekananda, एक आयरिश लेडी जिनका नाम था – मार्गरेट एलिजाबेथ, से मिले, जो बाद में आगे चलकर उनके मुख्य शिष्यों में से एक बनी, फिर बाद में उन्हें भगिनी, यानि की सिस्टर निवेदिता के नाम से जाना गया| 
 
सन 1896 में स्वामी जी, ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के मैक्स मुलर से मिले जो एक इंडो लोजिस्ट थे और स्वामी विवेकानंद जी के गुरु श्री रामकृष्ण परम हंस की जीवनी swami vivekananda biography लिखने वाले पश्चिम में प्रथम व्यक्ति थे| Swami Vivekananda Hindi Biography Story 

हार्वर्ड और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव से इंकार 

उनके ज्ञान और विद्वता को देखते हुए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से उन्हें अकादमी पद का प्रस्ताव दिया गया परन्तु अपने मठवासी जीवन के बन्धनों के कारण, Swami Vivekananda जी ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया| 
 
पश्चिमी राष्ट्रों के चार साल के लम्बे सफ़र के बाद, साल 1897 में स्वामी विवेकानंद जी अपने वतन हिन्दुस्तान पुनः लौट आये, और अपनी यूरोप यात्रा के बाद, स्वामी विवेकानंद भारत के दक्षिणी क्षेत्र के स्थानों जैसे मद्रास, रामेश्वरम, पंबन, मदुरई और  कई जगहों पर लेक्चर देने गए| 
 

समाज सेवा और शिक्षा पर ज़ोर

रामकृष्ण मिशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा कार्य प्रारंभ हुए।
वो अपने भाषण में सदैव, निम्न वर्ग के लोगों की उत्थान की बात पर जोर देते थे और इन सभी स्थानों पर सामान्य पब्लिक और राज परिवारों ने इनका उत्साह के साथ स्वागत किया| 
 
सन 1899 में अपने गिरते स्वास्थ्य के बावजूद, Swami Vivekananda जी दूसरी बार अपनी पश्चिम की यात्रा के लिए निकले| इस बार उनके साथ इनकी शिष्य निवेदिता और एक स्वामी तुर्यानंद  भी गए| 
 
इस दौरान उन्होंने सैन फ्रांसिस्को और न्यू यॉर्क में, वेदांत सोसाइटी की स्थापना की और कैलिफ़ोर्निया में शांति आश्रम को स्थापित किया| सन 1900 में वे धर्म सभा हेतु पेरिस चले गए| यहाँ उनके लेक्चर शिवलिंग की पूजा और श्री मदभगवत गीता की सत्यता पर आधारित हुए| इस सभा के बाद भी वे कई स्थानों पर गए|
 

स्वामी विवेकानंद की हिंदुस्तान वापसी 

9 दिसंबर 1900 को वापस कलकत्ता वापस चले आये और फिर वेल्लूर स्थित, वेल्लूर मठ गए| वहां इनसे मिलने वालो में जन साधारण जनता से लेकर राजा और राजनैतिक नेता भी शामिल हुए|
 

देशभर में भाषण और जन-जागरण

युवाओं के लिए संदेश

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा और फिलासफी कुछ इस प्रकार से है| स्वामी विवेकानंद की विचारों में राष्ट्रीयता हमेशा सम्मिलित रही| वे हमेशा देश और देशवासियों के विकास और उत्थान के लिए हमेशा कार्यरत रहे|

राष्ट्रीय चेतना का विकास

 
उनका कहना था की हर एक मनुष्य को अपनी जिंदगी में एक विचार या संकल्प, निश्चित कर लेना चाहिए और अपनी पूरी जिंदगी उसी संकल्प के लिए न्यौछावर कर देना चाहिए तब ही आप सफल हो सकें| 

 

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु (Death) How did Swami Vivekananda die?

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कब हुई 9Swami Vivekananda Hindi Biography Story)

4 जुलाई 1902 को, अपनी जिंदगी के अंतिम दिन को, स्वामी विवेकानंद, प्रातः जल्द ही बिस्तर छोड़ दिए थे, वे वेल्लूर स्थित मठ पहुँचे और वहीँ पर उन्होंने 3 घंटो तक ध्यान किया और फिर वहां मौजूद अपने शिष्यों को संस्कृत व्याकरण, फिलासफी, वेदों का ज्ञान, और योग की शिक्षा दी| 4 जुलाई को swami vivekananda jayanti होती है|
 

महासमाधि और अंतिम संस्कार

 
4 जुलाई 1902 को उन्होंने महासमाधि ली। शाम को 7 बजे स्वामी विवेकानंद अपने कमरे में गए और किसी को भी उन्हें डिस्टर्ब करने से मना कर दिया| रात 9 बजकर 10 मिनट पर ध्यान के दौरान उन्होंने अपना मानव  शरीर त्याग swami vivekananda death दिया|
 
उनके शिष्यों के अनुसार उन्होंने  महासमाधि ली थी और Swami Vivekananda का अंतिम संस्कार गंगा नदी के तट पर किया गया|
 

12 जनवरी – राष्ट्रीय युवा दिवस

उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद का योगदान Swami Vivekananda Hindi Biography Story

स्वामी विवेकानंद का योगदान कुछ इस प्रकार से है, अपने जीवन काल में स्वामी जी ने जो भी कार्य किये और इसके द्वारा जो योगदान दिया उसके क्षेत्र को हम निम्न तीन भागों में बाँट सकते हैं – 

 
1- वैश्विक संस्कृति के प्रति योगदान 
2- भारत के प्रति योगदान 
3-हिंदुत्व के प्रति योगदान 
 
वैश्विक संस्कृति के प्रति महत्वपूर्ण योगदान- Swami Vivekananda ने धर्म के बारे में एक नई और विस्तृत समझ विकसित की| उन्होंने शिक्षा और आचरण के नए सिद्धांत स्थापित किये| 
 
उन्होंने सभी लोगों के मन में, प्रत्येक इंसान के प्रति नया और विस्तृत नजरिया रखने की प्रेरणा दी| उन्होंने पूर्व और पश्चिम के देशों के बीच, जुड़ाव का कार्य किया|
 
भारत के प्रति योगदान – उन्होंने भारत के साहित्य को अपनी रचनाओं के द्वारा और समृद्ध बनाया | उनके प्रयास से लोगों का संस्कृत से लगाव उत्पन्न हुआ| Swami Vivekananda ने भारतीय संस्कृति का महत्त्व समझाया और पश्चिमी सभ्यता के दुष्प्रभावों को वर्णित किया| 
 

स्वामी विवेकानंद की प्रमुख पुस्तकें Books by Swami Vivekananda

उनकी कुछ रचनायें books written by swami vivekananda, जो उनके जीवन काल में ही प्रकाशित हुईं| उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी बहुत सी रचनाएँ प्रकाशित हुई| 
 

मृत्यु के बाद प्रकाशित रचनाएँ

निष्कर्ष (Conclusion)-Swami Vivekananda Hindi Biography Story

स्वामी विवेकानंद सिर्फ एक संन्यासी या आध्यात्मिक गुरु नहीं थे, बल्कि वे ऐसे महान विचारक थे जिन्होंने भारत की चेतना को नई दिशा दी। अपने छोटे से जीवन में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत की वास्तविक ताकत उसकी आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और जागरूक युवा शक्ति में छिपी है। शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन से लेकर देश के साधारण लोगों तक, उन्होंने आत्मबल, कर्म की महत्ता, सेवा भावना और मानव कल्याण का संदेश पहुँचाया।

आज भी उनके विचार उतने ही सार्थक हैं जितने उनके समय में थे। वे हमें सिखाते हैं कि जीवन में लक्ष्य तय करके निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। यदि वर्तमान समय का युवा स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाए, तो उसका व्यक्तित्व निखरेगा और समाज तथा राष्ट्र का भी विकास होगा। स्वामी विवेकानंद का जीवन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है, जो अपने भीतर मौजूद सामर्थ्य को पहचानकर जीवन में कुछ सकारात्मक और बड़ा करना चाहता है।

FAQ – Swami Vivekananda Hindi Biography Story

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद कौन थे?
उत्तर: स्वामी विवेकानंद भारत के महान संत, दार्शनिक और विचारक थे। उन्होंने वेदांत दर्शन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई और युवाओं को आत्मविश्वास व सेवा का संदेश दिया।

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था।

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद के गुरु कौन थे?
उत्तर: स्वामी विवेकानंद के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस थे, जिन्होंने उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान और सत्य का मार्ग दिखाया।

प्रश्न: शिकागो धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने क्या कहा था?
उत्तर: 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में उन्होंने “मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों” कहकर भाषण की शुरुआत की, जिससे भारत को विश्व मंच पर सम्मान मिला।

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कब हुई?
उत्तर: स्वामी विवेकानंद ने 4 जुलाई 1902 को महासमाधि ली।

प्रश्न: 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है, इसलिए भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया।

देश में जातिवाद को ख़त्म करने के लिए स्वामी जी ने निचली जातियों के कार्य के महत्व को समझाया और उन्हें समाज की प्रमुख धारा से जोड़ दिया| धन्यवाद 

स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार

खुद पर विश्वास रखना ही जीवन की पहली जीत है।
जिस दिन इंसान अपनी ताकत पहचान लेता है, उसी दिन उसके लिए असंभव शब्द खत्म हो जाता है।

2️⃣ ज्ञान वही सार्थक है जो चरित्र को मजबूत बनाए।
सिर्फ किताबें पढ़ लेना काफी नहीं, सही आचरण और अच्छे कर्म ही इंसान को महान बनाते हैं।

3️⃣ सेवा का भाव ही सच्ची पूजा है।
दुखी और जरूरतमंद की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म और ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग है।

4️⃣ डर इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी है।
जो व्यक्ति भय से मुक्त होकर सत्य के मार्ग पर चलता है, वही अपने जीवन का सही उद्देश्य पा सकता है।

5️⃣ युवा वही है जो सपने देखे और उन्हें पूरा करने का साहस रखे।
ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ किया गया प्रयास ही भविष्य को उज्ज्वल बनाता है।

Swami Vivekananda thoughts 

 
 

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