हनुमान जयंती पूजा विधि | हनुमान जी की कहानी

Hanuman Jayanti हनुमान जयंती पूजा विधि | हनुमान जी की कहानी

बजरंग बलि हनुमान आप सभी की हमेशा रक्षा करें |

हर साल चैत्र महीने में पूर्णिमा तिथि को, हनुमान जयंती का त्यौहार बड़े उल्लास से मनाया जाता है| ऐसी मान्यता है की इसी दिन भगवान शंकर जी हनुमान जी के रूप में अवतार लिया था| हनुमान जी को भगवान भोलेनाथ के 11वें अवतार के रूप में पूजा जाता है|

हनुमान जयंती के इस पावन मौके पर, हनुमान जी की विधि विधान से पूजा करने से हर संकट नष्ट हो जाता है| संकट मोचक श्री हनुमान जी बहुत दयालु हैं| उनकी कृपा से हर बुरा वक़्त आसान हो जाता है| हर मनोकामना पूरी हो जाती है |

जिस किसी के ऊपर भी बजरंग बलि की कृपा हो जाये उसका जीवन खुशियों से भर जाता है|

आईये जानते हैं कुछ ऐसी बातें जो आपको बजरंग बलि की पूजा करते समय जरूर ध्यान में रखना चाहिए |

बहुत से लोग आज के दिन व्रत भी रखते हैं | आपको बता दें की बजरंग बलि का जो लोग व्रत रखते हैं, उन्हें आज के दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए | जहाँ तक संभव हो मीठा भोजन ही अज के दिन ग्रहण करना चाहिए |

आज के दिन अगर आप पका हुआ खाना या कोई भी खाने की चीज दान में देते हैं तो उन चीजों का सेवन आपको खुद नहीं करना चाहिए |

व्रत में आप फलों का सेवन आप कर सकते हैं | शारीरिक तौर पर स्वस्थ लोगों को ही व्रत रखना चाहिए| हनुमान जी की पूजा से पहले भगवान श्री राम और माता सीता की पूजा करनी चाहिए |क्योंकि बजरंग बलि अपने आराध्य भगवान् श्री राम के बिना अधूरे होते हैं |

ये बात तो सभी जानते हैं की हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं ऐसे जो भी गृहस्थ लोग व्रत करते हैं उन्हें एक दिन पहले से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए |

माना तो यही जाता है की स्त्रियों को बजरंग बलि की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए तो आप लोग दूर से ही बजरंग बलि को लड्डुओं का भोग लगा सकते हैं|

आज के दिन रंगों का भी आपको खास ध्यान रखना चाहिए| बजरंग बलि की पूजा करते समय कुछ रंगों के इस्तेमाल से, बहुत से अशुभ परिणाम सामने आने लगते हैं | इसलिए इनकी पूजा करते समय केवल नारंगी, लाल या पीले के वस्त्र ही धारण करने चाहिए | क्योंकि यही रंग हनुमान जी को काफी प्रिय होते हैं |

अगर किसी को जीवन में विरोध काफी ज्यादा परेशान करते हों तो ऐसे लोगों को मुख्य तौर पर हनुमान जयंती के दिन चमेली के तेल सिन्दूर मिलाकर बजरंग बलि के शरीर पर लेप लगाना चाहिए | साथ ही इसे आप अपने माथे पर तिलक के रूप में भी जरूर लगायें| ऐसा करने से हनुमान जी बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं |

आज के दिन हनुमान चालीसा, सुन्दर काण्ड, बजरंग बाण और रामायण का पाठ भी जरूर करना चाहिए| इन्ही सब कार्यों पवनपुत्र हनुमान बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं |

इस दिन हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए, उनके सामने चौमुखी दीपक अवश्य जलाना चाहिए | पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा और सुन्दर कांड का पाठ जरूर करना चाहिए | क्योंकि शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे किसी भी मंत्र का जाप करना बहुत शक्तिशाली होता है |

हनुमान जी को आप गेंदे, गुलाब या कनेर का फूल अर्पित कर सकते हैं|  प्रसाद के लिए माल पुआ, मोती चूर के लड्डू, चूरमा , कोई भी मौसमी फल का भोग, आज के दिन भगवान हनुमान जी को जरूर लगाना चाहिए | ऐसा करने से अगर आपके ऊपर कोई झूठा दोष लगा है तो वो दूर हो जाता है | सारे पाप समाप्त हो जाते हैं |

जिन लोगों को मंगल या शनि गृह से कोई पीड़ा आ रही हो, ऐसे लोगों को हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग लगाना चाहिए |

हनुमान जयंती के शनिवार के दिन पड़ने पर, उसका महत्व और भी बढ़ जाता है| शनिवार के दिन आप हनुमान जी की विधिवत पूजा एवं व्रत रखके बजरंग बलि को सिन्दूर अवश्य चढ़ाएं| और फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें | ऐसा करने से आपकी कुंडली व्याप्त मंगल दोष शांत हो जाता है | सारे रोग सारी व्याधियां आपके जीवन से भाग जाती हैं |

इस हनुमान जयंती पर आप हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाने से भगवान् श्री राम की कृपा भी आपको प्राप्त होती है | आपके बिगड़े काम भी बनने लग जाते हैं|

हनुमान जी में अटूट विश्वास रखने वाले लोग हनुमान जयंती पर उनको ध्वजा भी चढ़ाते हैं | हनुमान जी को नारंगी, लाल या पीला झंडा अर्पित करने से मान सम्मान में वृद्धि होती है| जो भी काम आप करते हैं उसमे सफलता अवश्य मिलती है | झंडा हमेशा तीन कोनो वाला यानि त्रिकोणीय होना चाहिए | उस झंडे पर श्री राम लिखा होना चाहिए |

ये झंडा आपको मंदिर के सबसे ऊपरी हिस्से पर अपने हाथ से लगाना चाहिए | मंदिर में न लगा पाए तो आपको ये झंडा अपने घर के सबसे ऊपरी भाग में लगा देना चाहिए |

हिन्दू धर्म में सबसे जागृत और शक्तिशाली देवताओं में एकमात्र हनुमान जी ही ऐसे हैं जिनकी सबसे ज्यादा पूजा की जाती है | इनकी पूजा करने के पीछे मान्यता ये है की जिनके सर पर बजरंग बलि का हाथ हो उनका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता | दसों दिशाओं और चारों युगों में उनका प्रताप है |

जो इन्सान भी उनसे जुड़ जाता है मानो उनके हर सर संकट दूर हो गएँ हैं| अगर आपकी कोई विशेष मनोकामना है उसकी पूर्ति के लिए हनुमान जयंती के दिन पीपल के 11 पत्ते लेकर उन्हें गंगा जल से धोने के बाद सिन्दूर और चमेली के तेल के मिश्रण से इन पत्तों पर श्री राम लिखकर पीपल की जड़ में अर्पित कर दें | ऐसा करने से पहले आपको हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए |

मनोकामना पूर्ति के लिए आते के दीपक का भी विशेष महत्व है| इस दिन आपको अपनी मनोकामना को जल्दी से पूर्ण करने के लिए, हनुमान जी के सामने आटे के दीपक को जलाना चाहिए | बजरंग बलि का मंदिर अगर न मिले तो पीपल के पेड़ के नीचे भी ये दीपक आप बजरंग बलि का ध्यान करते हुए जला सकते हैं |

और जब आपकी मनोकामना पूरी हो जाए तो आप हनुमान जी के मंदिर में झंडा चढ़ा दें, चोला चढ़ाएं | आटे के उतना ही दीपक फिर से जलाकर मंदिर में लड्डू का भोग लगायें |

पूर्णिमा के दिन आप बजरंग बलि की पूजा सुबह या शाम किसी भी समय कर सकते हैं| शनिवार की हनुमान जयंती को शनिदेव की भी पूजा आप जरूर करें | सरसों के तेल का दीपक शनि मंदिर में जरूर जलाएं |

बजरंग बलि को सिन्दूर क्यों चढ़ाया जाता है ?

इसके लिए पुराणों में एक बहुत ही सुन्दर रोचक कहानी प्रचलित है | इस कहानी के अनुसार जब भगवान् श्री राम रावण को मारकर वापस आ चुके थे और उनका राज्याभिषेक हो चुका था| तब उन्होंने राजकार्य संभाल लिया था| राजा राम ने इसके बाद सभी वानर और राक्षस मित्रो को ससम्मान विदा किया | अंगद को विदा करते समय भगवान् श्रीराम रो पड़े थे|

हनुमान जी को विदा करने की शक्ति तो भगवान श्री राम में भी नहीं थी | क्योंकि माता सीता हनुमान जी को पुत्रवत मानती है| इसलिए हनुमान जी अयोध्या में ही रह गए| और बाकी सब वहाँ से सम्मान के साथ विदा हो गए |

अब भगवान् श्री राम दिन भर दरबार में अपना राज काज सँभालते इस तरह वो व्यस्त रहते | शाम के समय जब उन्हें अपने कामो को पूरा करने के बाद एक दिन वो अपने माता तथा भाईयों का कुशल क्षेम पूछने के लिए अपने कक्ष में पहुँचे, हनुमान जी उनके पीछे पीछे ही थे |

भला ऐसा हो सकता है जहाँ राम जी हों वहाँ हनुमान जी न हों |

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी के कक्ष में बजरंगीजी और राम जी के सभी अनुज अपनी पत्नियों के साथ मौजूदथे | पहले 14 सालों के वनवास, लड़ाईयां तथा कई औपचारिकताओं के बाद ये पहला अवसर था जब पूरा रघुकुल एक साथ था| प्रभु श्रीराम, श्री लक्ष्मण और माँ सीता को छोड़कर, वहाँ अन्य वधुओं को हनुमान जी का उस कक्ष में मौजूद होना बड़ा अजीब सा लग रहा था|

क्योंकि शत्रुघ्न सबसे छोटे थे इसलिए वो ही अपनी भाभियों और अपनी पत्नी की इच्छा पूर्ति के लिए, इनके इशारों को समझकर हनुमानजी को कक्ष के बाहर जाने के लिए कह रहे थे |

पर आश्चर्य की बात हनुमान जी जो इतने बड़े ज्ञाता हैं , वो शत्रुघ्न के मामूली से संकेत को समझ ही नहीं पा रहे थे| इस तरह उनकी उपस्थिति पर ही सारे परिवार ने जी भर के बातें की |

फिर भरत को ध्यान आया की भईया भाभी को भी एकांत मिलना चाहिए| उर्मिला को देखकर भी उन्हें लगता था की इस पतिव्रता स्त्री को भी अपने पति का सानिध्य चाहिए |

तब उन्होंने श्री राम से आज्ञा ली और सबको जाकर विश्राम करने की सलाह दी | सभी माता सीता और श्रीराम का चरण स्पर्श करके जाने लगे लेकिन हनुमान जी वहीँ बैठे रहे | ऐसा देखकर सभी उनके भी बाहर जाने का इंतज़ार करने लगे की जब ये बाहर निकले तो हम भी बाहर निकले |

लेकिन बजरंग बलि थे की टस से मस ही नहीं हो रहे थे और वहीँ बैठे रहे | तब श्री राम ने मुस्कुराते हुए बजरंग बलि से कहा क्यों वीर तुम भी जाओ थोड़ा विश्राम कर लो | हनुमान जी बोले प्रभु जब आप मेरे सामने हैं तो इससे अच्छा विश्राम भला मेरे लिए और क्या हो सकता है ?

मैं तो आपको छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला | ये बात सुनकर शत्रुघ्न को थोड़ा गुस्सा आ गया| उन्होंने कहा कपीश्वर लेकिन भईया को भी तो विश्राम की आवश्यकता है | उन्हें भी तो एकांत चाहिए |

ऐसा सुनकर बजरंग बलि कहने लगे – हाँ तो मैं कौन सा प्रभु के विश्राम में बाधा डाल रहा हूँ ? मैं तो यहाँ एक तरफ किनारे पर बैठा हुआ हूँ | शत्रुघ्न ने कहा  आपने कदाचित सुना नहीं भईया को एकांत की आवश्यकता है |

हनुमान जी फिर से बोले पर माता सीता भी तो यहीं हैं वो भी कहीं नहीं जा रही फिर आप सब मुझे ही क्यों बाहर निकालना चाहते हैं ?

फिर शत्रुघ्न बोले भाभी को भईया के एकांत में भी रहने का अधिकार प्राप्त है कपीश्वर ! क्या आपको भाभी के माथे पर लगा हुआ सिन्दूर नहीं दिखाई पड़ता ?

ये बात सुनकर हनुमान जी बहुत हैरान हो गए | और श्री राम से बोले प्रभु क्या ये सिन्दूर लगाने से किसी को आपके पास रहने का अधिकार प्राप्त हो जाता है ? श्री राम मुस्कुराते हुए बोले कपीश्वर अवश्य यही तो सनातन प्रथा है |

ये बात सुनकर हनुमान जी बहुत मायूस होकर उठे और भगवान श्री राम और माता सीता को प्रणाम करके कक्ष से बाहर चले गए |

अगले दिन रोज की तरह भगवान श्री राम का दरबार लगा तभी बाहर कुछ शोर गुल हुआ | पता चला की प्रतिष्ठित व्यापारी न्याय मांगने के लिए दरबार में उपस्थित हुए हैं | बात पता चली की हनुमान जी पूरे व्यापारियों की दुकान तोड़कर पूरी रात उत्पात मचाते रहे | श्री राम ने जब ये सुना तो सैनिकों तो आदेश दिया की हनुमान को तुरंत पकड़कर राज्य सभा में उपस्थित किया जाए |

रामजी की आज्ञा के पालन के लिए सैनिक अभी निकले भी नहीं थे की केसरिया रंग से रंगे पुते हनुमान अपनी चौड़ी मुस्कान और हाथी जैसी मस्त चाल से चलते हुए सभा में उपस्थित हो गए | उनका पूरा शरीर सिन्दूर में नहाया हुआ था | एक एक कदम चलने पर उनके शरीर से एक एक सेर सिन्दूर धरती पर गिर रहा था |

उनकी चलने से हवा के साथ पीछे की ओर सिन्दूर भी उड़ रहा था| मस्त चाल और मोहक मुस्कान के साथ हनुमान जी प्रभु राम जी के पास पहुँचे और उन्हें प्रणाम किया | अभी तक सन्न पूरी सभा बजरंग बलि को देखकर जोर जोर से हंसने लगी | आखिर में एक बन्दर ने बंदरो वाला काम ही किया \

अपनी हंसी रोकते हुए लक्ष्मण जी ने कहा ये क्या किया कपिश्रेष्ठ ? ये सिन्दूर से स्नान क्यों ? क्या ये आप वानरों की कोई नई प्रथा है ? अरे नहीं भईया ये तो आर्यों की प्रथा है मुझे तो कल ही पता चला की एक चुटकी सिन्दूर अगर कोई लगा ले तो प्रभु श्री राम के समीप रहने का उसे अधिकार हासिल हो जाता है फिर उसे कोई श्री राम से दूर नहीं कर सकता |

जब मुझे ये बात पता चली तो मैंने सारी अयोध्या का सिन्दूर अपने ऊपर लगा लिया |

क्यों प्रभु? अब तो कोई मुझे आपसे दूर नहीं कर पायेगा न ? बजरंग बलि की ये बात सुनकर पूरी सभा हँस रही थी लेकिन भारत हाथ जोड़कर आंसू बहा रहे थे | ये देखकर शत्रुघ्न बोले भईया सभी हँस रहें हैं और आप रो रहें हैं  ऐसा क्या हुआ ?

किसी तरह खुद को सँभालते हुए भरत बोले – तुम देख नहीं रहे , वानरों का एक श्रेष्ठ नेता, वानर राज का सबसे विद्वान मंत्री कदाचित मानव जाति का सबसे श्रेष्ठ वीर, सभी सिद्धियों और निधियों का स्वामी, वेदों का पारंगत शास्त्रों का मर्मग्य ये कपिश्रेष्ठ कैसे अपना सारा ज्ञान भूलकर राम भक्ति में लीं है| राम भक्ति को हासिल करने कैसे उत्कंठ इच्छा जो ये स्वयं को भूल चुका है |

ऐसी भक्ति का वरदान कदाचित ब्रह्मा जी भी किसी को न दे पायें हों | मुझ भरत को श्रीराम का भाई मानकर भले ही कोई याद कर ले पर इस भक्त शिरोमणि हनुमान को संसार कभी नहीं भूल पायेगा | ऐसे वीर हनुमान को मेरा बारम्बार प्रणाम हैं |

बोलिए हनुमान जी की जय | ये थी हनुमान जयंती पर सुनी जाने वाली कथा | अगर ये कथा आपको अच्छी लगी हो तो इसे हर किसी के बीच जरूर शेयर करिएगा |

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *