सर आईजक न्यूटन का जीवन परिचय

Sir Isaac Newton Biography in Hindi

हमारा विज्ञान जहाँ से शुरू होता है उसके आधार हैं- सर आईजक न्यूटन| Sir Isaac Newton Biography

isaac newton real image

ये महान वैज्ञानिक, गणितज्ञ, ज्योतिष और दार्शनिक हम सभी के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं| जब हम बचपन में विज्ञान पढ़ना शुरू करते थे तो सबसे पहले जिस वैज्ञानिक का नाम आता था वो थे न्यूटन|

पर ये मुकाम मित्रों आसानी से हासिल नहीं होता| जो लोग दुनिया की नजर में पागल और मंदबुद्धि होते हैं, वही लोग दुनिया को बदलकर जाते हैं|चलिए आज ऐसे ही शख्स की कहानी जानते हैं जिसने पूरी दुनिया का नजरिया ही बदलकर रख दिया|

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Sir Isaac Newton History

हम सभी ने सुनी है सर आईजक न्यूटन की एप्पल वाली कहानी| जिसमे न्यूटन सेब के पेड़ के नीचे बैठे हुए थे और एक सेब उनके सर पर जा गिरता है और तुरंत उन्हें गुरुत्वाकर्षण मतलब उस बल के बारे में समझ आ जाता है जो सेब को नीचे गिराता है| पृथ्वी को सूर्य के चक्कर लगाता है और समंदर में ज्वार लाता है|

आईजक न्यूटन ने अपनी सोच के बलबूते इस विश्व को ऐसे वैज्ञानिक सिद्धांत दिए जिसके बिना हम विज्ञान के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं|  न्यूटन की जिंदगी के बारे में बताने से पूर्व हम आपको उनकी कुछ महत्वपूर्ण खोजों के बारे बताते हैं|

न्यूटन के आविष्कार Sir Isaac Newton Inventions

Isaac Newton Discoveries इन्होने ही सबसे पहले गति के तीनो नियमों का पता लगाया| गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया, गणित में कैलकुलस की नींव डाली| और प्रिज्म की सहायता से सबसे पहले पता लगाया की सफ़ेद रंग वास्तव सात रंगों से मिलकर बनता है|

गुरुत्वाकर्षण नियम और कैलकुलस का आविष्कार 

न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण नियम ( Law of Gravity ) की खोज की थी| उन्होंने बताया की गुरुत्वाकर्षण बल नाम की एक शक्ति होती है जो हर चीज को अपनी ओर आकर्षित करती है| इसी बल के कारण चंद्रमा धरती के चक्कर लगाता है और पृथ्वी सूर्य का|

न्यूटन का मानना था गुरुत्व्वाकर्षण की सहायता से पृथ्वी और सोलर सिस्टम की गतिविधियों को भी समझा जा सकता है| लेकिन उस वक़्त की गणित इतनी विकसित नहीं थी की उन ऑब्जेक्ट्स की गति को कैलकुलेट किया जा सके| इसलिए उन्होंने अपनी खुद की गणित कैलकुलस का आविष्कार कर डाला|

हालाँकि इसमें एक विवाद भी है कैलकुलस को सबसे पहले किसने खोजा?

जर्मन गणितज्ञ Gottfried Leibniz ने जब पहली बार अपना पेपर पब्लिश किया तब न्यूटन ने ये दावा किया की ये काम वो 20 साल पहले ही कर चुके हैं| वास्तव में न्यूटन काफी संकोची स्वाभाव के थे| वो अपनी किसी भी खोज या आविष्कार को आसानी से पब्लिक नहीं करते थे|

गति के तीनो नियमों की खोज 

इसके अलावा आईजक न्यूटन ने गति के तीन नियम (लॉ ऑफ़ मोशन ) भौतिक विज्ञान में सबसे अधिक इस्तेमाल में आते हैं| इस नियम का प्रयोग एक साईकिल बनाने से लेकर विमान बनाने तक में किया जाता है|

आईजक न्यूटन के रंगों का नियम

न्यूटन ने प्रकृति के अनेक अनजाने रहस्यों का पता लगाया| उन्होंने ही बताया सूर्य का प्रकाश जो देखने में सफ़ेद लगता है वास्तव में वह बैगनी, जामुनी, पीले, नीले, हरे, नारंगी और लाल सात रंगों से मिलकर बना है| इन सात रंगों को एक प्रिज्म की मदद से अलग अलग किया जा सकता है|

sir isaac newton scientist

न्यूटन ने एक ऐसी दूरबीन का आविष्कार किया था जिसमे प्रकाश लेंस से गुजरने के स्थान पर दर्पण से परिवर्तित होता था| उनकी इस दूरबीन में 2.5 सेंटीमीटर का दर्पण लगा था| इन सबके अतिरिक्त आईजक न्यूटन ने कई खोज किये लेकिन इस आर्टिकल में हम उनके जीवन के बारे में चर्चा करेंगे|

जानेंगे हम आईजक न्यूटन की जिंदगी की गजब की कहानी इस आर्टिकल में|

महान वैज्ञानिक न्यूटन का जीवन परिचय isaac newtons life

यूनाइटेड किंगडम के Woolsthorpe में एक किसान परिवार निवास करता था| आईजक न्यूटन इंग्लैंड के उसी किसान परिवार में पैदा हुए थे| न्यूटन अपने पूरे जीवन पिता के प्यार से वंचित रहे| क्योंकि उनके इस संसार में आने से तीन महीने पहले ही उनके पिता का निधन हो चुका था| उनके पिता एक किसान थे और उनका नाम भी आईजक न्यूटन था|

Isaac newton: early life story

आईजक न्यूटन की मृत्यु के करीब तीन महीने बाद 4 जनवरी 1643 के दिन उसकी पत्नी ने एक कमजोर बच्चे को जन्म दिया जिसे डाक्टरों ने ये कह दिया था की ये बालक शायद ही ज्यादा दिनों तक जीवित रह पाए| परन्तु वो नन्हा बालक जब बड़ा हुआ तो संसार की तमाम मान्यताओं को बदलकर रख दिया| आज भी जिसकी गिनती इतिहास के महान वैज्ञानिकों में की जाती है|

उस समय एक अलग कैलेंडर प्रयोग में लाया जाता था जूलियन कैलेंडर| इसलिए न्यूटन की जन्म तारीख 25 दिसंबर 1642 भी बताई जाती है|

न्यूटन अपने जन्म के समय ही बहुत कमजोर थे क्योंकि उनका जन्म ग्यारह सप्ताह पहले ही हो गया था| उनके जिन्दा रहने की सम्भावना काफी कम थी| लेकिन ऊपर वाले ने न्यूटन को महान काम करने के लिए जीवित रखा| बहुत मुश्किलों के बाद उनकी जान बचाई जा सकी थी|आईजक न्यूटन का नाम उनके स्वर्गवासी पिता के नाम पर ही रखा गया था|

आईजक न्यूटन के बचपन से माँ बाप का साया हट गया 

Sir Isaac Newton Biography

न्यूटन जब तीन साल के हुए तब उनकी माँ Hannah Newton ने Barnabas Smith से शादी कर लिया| Barnabas Smith एक अमीर चर्च प्रतिनिधि थे|

The life of Sir Isaac Newton

उनके सौतेले पिता आईजक न्यूटन को अत्यधिक कमजोर होने के कारण बिलकुल भी पसंद नहीं करते थे| इसलिए उनकी माँ ने अपने बेटे आईजक न्यूटन को उसकी नानी के पास छोड़कर अपने नए पति के साथ चली गई|

इस घटना ने आईजक न्यूटन के ऊपर गहरा प्रभाव डाला| और बड़े होकर उन्हें असुरक्षा महसूस होने लगी| वो अपने जीवन में बेचैन रहने लगे थे और उनका व्यवहार भी काफी तीखा होने लगा था|मात्र तीन साल का होने तक माँ और बाप दोनों का साया सर से हटने के कारण, आईजक न्यूटन बचपन से अकेलेपन की चद्दर से लिपटकर सोने लगे|

Sir Isaac Newton Biography

जीवन में जब कोई अकेलेपन का शिकार होता है तो वो दो दिशाओं में अपने कदम बढ़ा सकता है| या तो गुस्से और निराशा में कोई अपराध कर बैठेगा या तो उस पर जीत हासिल करके कामयाब होने पर फोकस करेगा| आईजक न्यूटन ने दोनों ही काम किया|

आज भी यूनाइटेड किंगडम के Fitzwilliam Museum में उपलब्ध आईजक न्यूटन की लिस्ट ऑफ़ सेंस ये बयां करती है की आईजक न्यूटन ने अपने सौतेले पिता और माँ को घर समेत जिन्दा जलाने की धमकी भी दी| वो अलग बात है की उन्होंने ऐसा किया नहीं|

शुरुवाती दिनों में न्यूटन ठीक से बोल भी नहीं पाते थे और साथ ही साथ बहुत जिद्दी और गुस्सैल स्वाभाव के थे| इसलिए उनके कोई दोस्त भी नहीं हुआ करते थे| और बच्चे उन्हें पागल कहकर भी बुलाया करते थे|

Sir Isaac Newton Education

शुरुआत से ही वो चाँद तारों के बारे में सोचा करते थे और इन्ही चीजों से सम्बंधित सवाल अपने नाना नानी से किया करते थे| लेकिन उनके नाना नानी उनके सवालों का जवाब सही ढंग से नहीं दे पाते थे| क्योंकि उस समय तक विज्ञान में काफी कम खोजें हो पाईं थीं|

12 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल जाना शुरू किया| उनकी शुरुवाती पढ़ाई ग्रान्थम के किंग्स स्कूल में हुई| न्यूटन पढ़ाई में बिलकुल भी अच्छे नहीं थे| पढ़ाई और शारीरिक रूपे से कमजोर होने के कारण, स्कूल में बच्चे उनका मज़ाक बनाया करते थे | इस बात को लेकर हर दिन उनका स्कूल के बच्चों के साथ उनका झगड़ा हुआ करता था| यहाँ तक उनके लड़ाई झगड़े के कारण उन्हें स्कूल से भी निकाल दिया गया था|

Sir Isaac Newton Biography

इसी दौरान उनके सौतेले पिता की भी मृत्यु हो गई | न्यूटन जब बारह साल के हुए तो दोबारा अपनी माँ के पास आ गए और फिर वो माँ के साथ ही रहे| अब उनके घर आमदनी का कोई भी साधन नहीं बचा था| घर के खर्चे तक चलाना बहुत मुश्किल हो रहा था| इस वजह से न्यूटन की माँ चाहती थी की वो अब खेती में अपना मन लगायें और अपने घर का खर्चा उठायें|

लेकिन न्यूटन की रूचि किसानी खेती में तनिक भी न थी| फिर न्यूटन की माँ ने स्कूल के प्रिंसिपल से बात करके न्यूटन को फिर से स्कूल भेजना शुरू कर दिया| इस बार न्यूटन ने उस स्टूडेंट से बदला लेने की सोच ली थी जिसके कारण उन्हें स्कूल से बाहर कर दिया गया था| अब वो पूरी शिद्दत से पढ़ाई करने लगे थे जिसकी वजह से जल्दी ही उनकी गिनती स्कूल के टापर्स में होने लगी|

उनके इसी स्कूल के पुस्तकालय की खिड़की के ऊपर, आज भी उनके हस्ताक्षर विद्यमान हैं|

कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में दाखिला 

इसके बाद साल 1661 में 19 वर्ष की उम्र में उनके चाचा की मदद से कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में उनको दाखिला मिल गया| वहाँ पर अपनी फीस भरने और अन्य खर्चों के लिए, न्यूटन अपने मित्रों और कॉलेज के अमीर छात्रो के यहाँ काम करते थे|

उस समय कॉलेज की शिक्षाएं अरस्तु के सिद्धांतो पर आधारित थीं लेकिन न्यूटन आधुनिक दार्शनिकों जैसे डेसकार्टेस और खगोल वैज्ञानिकों जैसे गैलिलियो, केपलर और कोपरनिकस के विचारों को पढ़ने में रूचि रखते थे|

Sir Isaac Newton Biography

इसी बीच साल 1664 में उन्हें अपने कॉलेज से स्कॉलरशिप भी मिली|जिसकी मदद से अब वो अपनी पढ़ाई और रिसर्च पर ज्यादा ध्यान दे सकते थे| साल 1665 में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कुछ गणितीय नियमो की खोज कर डाली| जिसे बाद में कैलकुलस का नाम दिया गया| 1665 में ही उनकी बी ए की पढ़ाई पूरी हो गई|

आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने एम ए में दाखिला लेने का मन बनाया| लेकिन एडमिशन के वक़्त ही अचानक लन्दन में प्लेग की महामारी फ़ैल गई| इस कारण से पूरे शहर को पूरी तरह से बंद करना पड़ गया था| इसलिए वो अपने माँ के पास गाँव वापस आ गए|

प्लेग महामारी की छुट्टियों में गुरुत्वाकर्षण का विचार दिमाग में आया 

Newton apple Tree Story

गाँव में इनकी माँ का एक सुन्दर सा बगीचा था| एक दिन न्यूटन अपने बगीचे में एक सेब के पेड़ के नीचे बैठे हुए कुछ सोच रहे थे तभी अचानक पेड़ से एक सेब नीचे गिरा| ऐसा देखकर उनके मन में विचार आया की यह सेब नीचे ही क्यों गिरा?

ये सेब ऊपर या दायें बाएं क्यों नहीं चला गया ? और भी दूसरी चीजें नीचे की तरफ ही क्यों गिरती हैं ?

आईजक न्यूटन इस निष्कर्ष पर पहुँचे की इसके पीछे जरूर कोई ठोस वजह है| न्यूटन अब तक सुनिश्चित हो चुके थे की उस पर कोई फ़ोर्स नीचे की ओर लग रहा है| यही नहीं एक फूल की हल्की पंखुड़ी और विशाल ग्रहों के बीच में कोई न कोई आकर्षण बल काम करता है|

भविष्य में इसी आधार पर न्यूटन ने सार्वत्रिक गुरुत्व्वाकर्षण का सिद्धांत की पेशकश की| इस सिद्धांत के अनुरूप ब्रह्माण्ड की हर एक वस्तु हर दूसरी वस्तु को एक आकर्षण बल के द्वारा अपनी तरफ खींचती है|

Sir Isaac Newton Biography

वर्ष 1667 में जब प्लेग महामारी का अंत हुआ तब आईजक वापस यूनिवर्सिटी पहुँच गए| न्यूटन को काम करने की जैसे लत सी लगी रहती थी| कभी कभी तो वो काम में इतना डूब जाते थे की उनको खाने पीने की भी सुध नहीं रहती थी|

न्यूटन को Lucasian Professor of Mathematician बना दिया गया

उन्हें Lucasian Professor of Mathematician के पद भार को सौंप दिया गया| इस पद पर विश्व के एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक बैठ चुके हैं जिसमे स्टीफन हाकिंस का नाम भी शुमार है|

न्यूटन दूसरे प्रोफेसरों से बिलकुल अलग थे| उनकी क्लास में अगर कभी कोई विद्यार्थी नहीं आता था तो वह खाली क्लास में ही लेक्चर देना शुरू कर दिया करते थे|

27 साल की उम्र में न्यूटन ट्रिनिटी कॉलेज के प्रोफेसर बन गए| बाद में न्यूटन रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष भी बने|sir isaac newton scientist

न्यूटन ने अपनी खोजों को दो पुस्तकों के रूप में छपवाया| प्रकाश से सम्बंधित उनके आविष्कार Opticks नामक पुस्तक में छपे थे और दूसरे आविष्कार PHILOSOPHIAE NATURALIS PRINCIPIA MATHEMATICA में छपे थे| जोकि साल 1687 में प्रकाशित हुई थी|

Sir Isaac Newton Death

उम्र के अंतिम पड़ाव में भी न्यूटन खगोलीय पिंडो की शोध कार्यों में लगे रहते थे| 84 साल की उम्र में वो रॉयल सोसाइटी की अध्यक्षता करने गए लेकिन लौटने के दौरान वो बीमार पड़ गए| साल 1727 तक उनके ब्लैडर में एक पत्थर बन गया था जिसने उनकी जान ले ली|

31 मार्च 1727 को इस महान वैज्ञानिक ने अंतिम साँसे ली| 31 मार्च 1727 को न्यूटन का अपने बिस्तर सोते समय ही निधन हो गया था|

उनकी मौत के बाद, उनके शरीर में अधिकांश मात्रा में पारे की मौजूदगी पाई गई थी| ये सब उनके रासयनिक प्रयोगों का कारण ही माना जाता है|

सर आईजक न्यूटन की धार्मिक रूचि 

यूँ तो न्यूटन को दुनिया के महान वैज्ञानिकों में से एक माना जाता है| लेकिन उन्होंने अपने जीवन काल में विज्ञान से कहीं ज्यादा धर्म और भगवान के बारे में लिखा हुआ है|

उन्होंने खुद लिखा है की गुरुत्वाकर्षण हमें ग्रहों की गति के बारे में बताता है| लेकिन ये नहीं बताता की इनको गति में किसने सेट किया है? ईश्वर सभी चीजों को नियंत्रित करता है और जानता है की क्या है और क्या किया जा सकता है!

न्यूटन के अनुसार ईसाईयों के पवित्र धार्मिक ग्रन्थ बाइबिल के अन्दर दुनिया के रहस्य को समझने का सार छिपा हुआ है| उनका ये मानना था की बाइबिल को अगर ध्यान से पढ़ा जाए तो आने वाले भविष्य का पता लगाया जा सकता|

बाइबिल का जूनून उनके ऊपर इस कदर सवार था की वो सिर्फ इसलिए हिब्रू भाषा सीखने चले गए क्योंकि उन्हें बाइबिल में छिपे गूढ़ अर्थों को समझना था|

साल 1936 तक दुनिया न्यूटन के इस धार्मिक पहलू से पूरी तरह अनजान थी| दुनिया को पहली बार इस बारे में पता तब चला जब 1936 में उनके द्वारा लिखी गई Theological Manuscripts यानि धर्मशास्त्र को नीलाम किया गया था|

आप ये जानकर हैरान हो जायेंगे की न्यूटन ने धर्म के ऊपर अपने हाथ से 7500 पेज लिख डाले थे|

धार्मिक होने के बावजूद न्यूटन भूत प्रेत या शैतानी आत्मा में विश्वास नहीं रखते थे|

सर आईजक न्यूटन एक अलकेमिस्ट 

इसके अलावा न्यूटन के जीवन में एक राज ऐसा भी था जिसे न्यूटन ने जीते जी दुनिया से छुपाकर रखा| वो तक़रीबन 25 वर्षों तक अल्केमी का अध्ययन करते रहे थे| अल्केमी प्राचीन समय के रसायन विज्ञान की उस तकनीक को कहते थे जिसमे साधारण धातु को सोने में बदलने और अमृत बनाने का प्रयास किये जाते थे|

इस विषय पर न्यूटन के द्वारा लिखे गए मनुस्क्रिप्ट्स को देखकर ये अंदाजा लगाया जाता है शायद वो उस पत्थर को बनाने की कोशिश कर रहे थे जिसका जिक्र पौराणिक या काल्पनिक कथाओं में किया जाता है|

इन कहानियों में बताया जाता है की इस पत्थर को प्राप्त करने वाला इंसान अमरता को हासिल कर लेता है| जिसने भी फिल्म हैरी पॉटर देख रखी वो इसके बारे में जरूर जानते होंगे|

आईजक न्यूटन लन्दन चले गए 

साल 1696 में कैंब्रिज से अपना 16 साल का करियर ख़त्म करके न्यूटन लन्दन चले गए ताकि रॉयलमिंट को चलाने में सरकार की सहायता कर सकें| मिंट उस स्थान को कहा जाता है जहाँ मुद्रा के सिक्के बनाये जाते हैं| उन दिनों इंग्लैंड में कुछ लोग सिक्कों के किनारों को काटकर नए सिक्के बनाने लगे थे| उन लोगों के ऐसा करने के कारण सरकार को काफी घाटा हो रहा था|

न्यूटन ने वहाँ अपने विज्ञान के जरिये सिक्कों के निर्माण के तरीकों में परिवर्तन कराये| और साथ ही उन लोगों को भी गिरफ्तार करवाया जो ये अपराध को अंजाम दे रहे थे|

साल 1705 इंग्लैंड की महारानी Anne ने न्यूटन को उनके असाधारण राजनैतिक योगदान के लिए Night का टाइटल दे दिया| और इस प्रकार न्यूटन सर आईजक न्यूटन बन गए|

अपने काम और विज्ञान की शोधों के लिए उन्होंने अपने सारे शौक और खुशियों का त्याग कर दिया था| उन्होंने पूरे जीवन शादी तक नहीं की और जब वो मरे तब भी वो वर्जिन थे|

न्यूटन एक भविष्य वक्ता 

न्यूटन ने बता दिया था की यहूदी इजरायल को फिर से हासिल करेंगे और उनकी ये भविष्यवाणी पूरी तरह सही साबित हुई|

बाइबिल को पढ़ने के बाद ही उनकी ये भविष्यवाणी सामने आई थी साल 2060 तक दुनिया ख़त्म हो जाएगी| इसके अतिरिक्त न्यूटन ये भी मानते थे की ईसा मसीह एक बार फिर दुनिया में आएंगे और दुनिया से बुराई ख़त्म कर देंगे|

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न्यूटन के बारे में रोचक जानकारी

एप्पल कम्पनी का जो सबसे पहले लोगो था, उसमे न्यूटन को दिखाया गया था| जिसमे वो सेब के पेड़ के नीचे बैठे हुए थे और सेब उनके सर के ऊपर हवा में था|

न्यूटन ने कई सालों तक अपनी खोजों को दुनिया से छिपाकर रखा| उन्हें इस बात का डर रहता था की शायद लोग उनकी खोजों की आलोचना करेंगे|

जिस साल प्रसिद्ध विचारक गैलिलियो का निधन हुआ था उसी साल न्यूटन का जन्म हुआ था|

न्यूटन ही वो वैज्ञानिक थे जिसने पहली बार ये बताया था की पृथ्वी गोल नहीं बल्कि अंडाकार है|

जिस सेब के पेड़ से न्यूटन के दिमाग में गुरुत्वाकर्षण का विचार आया था| उस पेड़ के वंशज आज भी इंग्लैंड में विद्यमान है| हालाँकि जो ओरिजिनल पेड़ था वो 1815-1820 के बीच नष्ट हो गया|

उसी वास्तविक पेड़ के लकड़ी का एक टुकड़ा न्यूटन की फोटो के साथ स्पेस में भी भेजा चुका है| ताकि न्यूटन ने हमें और विज्ञान को जो दिया है,, उनका आभार व्यक्त किया जा सके|

न्यूटन को साल 1689 से 1690 और इसके बाद 1701 में इंग्लैंड के संसद सदस्य में भी चुना गया था|

निष्कर्ष 

वैसे तो दुनिया में बहुत लोगों का जन्म होता है लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा के लिए अपना नाम सुनहरे अक्षरों में लिख जाते हैं| अगर यूँ कहें जब तक दुनिया में विज्ञान का नाम रहेगा तब तक सर आईजक न्यूटन का नाम अमर रहेगा|

ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा की न्यूटन अकेले ऐसे वैज्ञानिक थे जिसने आधुनिक विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था| उनके महान योगदान के लिए लोग उन्हें कभी नहीं भूल सकते|

दोस्तों न्यूटन के महान सिद्धांतो की वजह से ही आज कल की खोज संभव हो पाती हैं| आज के वैज्ञानिक न्यूटन की खोज को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं| और उन्ही के सिद्धांतो का सहारा लेकर काम करते हैं|

भाईयों इंसान अपने विचारों से बना होता है, वो जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है| अपनी सोच हमेशा सकारात्मक रखिये क्योंकि इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है|

कोई भी खोज एक बड़ी सोच के बिना नहीं की जा सकती – ये कहना है दुनिया को गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत देने वाले महान वैज्ञानिक आईजक न्यूटन का| Newton was great scientist.

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :

न्यूटन का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?

आइज़क न्यूटन यूनाइटेड किंगडम के वूलस्ठोर्पे में पैदा हुए थे |

न्यूटन किस देश में पैदा हुए थे?

आइज़क न्यूटन इंग्लैंड में पैदा हुए थे|

न्यूटन की मृत्यु कब हुई थी ?

आइज़क न्यूटन की मृत्यु 31 मार्च साल 1727 को हुई थी|

न्यूटन के पिता का नाम क्या था?

आइज़क न्यूटन के पिता का नाम भी आइज़क न्यूटन ही था| उनके जन्म से पहले उनके पिता की मृत्यु हो गई थी| इसलिए उनके स्वर्गासी पिता की याद में उनका नाम भी आइज़क न्यूटन ही रख दिया गया था|

न्यूटन का पूरा नाम क्या था?

महान वैज्ञानिक न्यूटन का पूरा नाम आइज़क न्यूटन था|

आइज़क न्यूटन की मृत्यु कैसे हुई थी|

न्यूटन के ब्लैडर में स्टोन बन जाने के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी| निधन के बाद इनके शरीर में पारे की काफी ज्यादा मात्रा पाई गई थी|

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