Motivational Story in Hindi for Success Louis Vuitton Biography

Motivational Story in Hindi for Success Louis Vuitton Biography

जीवन सबका एक जैसा नहीं होता| गरीब परिवार में जन्म लेना आपकी गलती नहीं है लेकिन उसी तरह गरीब परिवार में ही मर जाना ये आपकी और केवल आपकी गलती है| जीवन को कोसते रहना और हालात को जिम्मेदार ठहराना बहुत ही सरल होता है और दुनिया के अधिकतर लोग यही करते हैं |

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लेकिन इसी दुनिया में कुछ शख्स ऐसे भी होते हैं जो हालात के सामने झुकते नहीं हैं बल्कि हालात को अपने आगे घुटने टेक देने पर मजबूर कर देते हैं |

आज हम hindiaup पर लेकर आयें हैं एक ऐसे अनाथ बच्चे की स्टोरी जिसने अपने दम पर खड़ा कर दिया 22 लाख करोड़ की कम्पनी का एक बड़ा साम्राज्य | जी हां बाईस लाख करोड़ की कम्पनी !

तो चलिए शुरुवात करते हैं –

Louis Vuitton जी हाँ हम इसी के बारे में बात करेंगे| ये कम्पनी का नाम भी है और इंसान का नाम भी है | इस इंसान ने खड़ी कर दी ऐसी कम्पनी जिसकी वैल्यू आज 30 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा है |

लेकिन क्या आप जानते हैं 22 लाख करोड़ की इस कम्पनी की नींव रखने वाले इंसान के पास, बचपन में अपना सर ढंकने के लिए छत तक नहीं थी दोस्तों |

लोग कामयाब लोगों को देखते हैं तो उनकी बुलंदी, शोहरत और मुकाम को देखते हैं | लेकिन उस मुकाम तक पहुँचने के लिए वो जिन जिन कठिनाईयों का सामना करता है, उनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं |

आज हम आपको Louis Vuitton की वो अनसुनी कहानी बताने जा रहें हैं जो शायद आपको आज तक नहीं पता होगी |

Louis Vuitton success story 

चलिए थोड़ा पीछे चलते हैं, ये बात है उन्नीसवीं शताब्दी की जब एक बच्चा जिसके पास न घर था न खाने के लिए खाना | उसके पास कुछ था तो सिर्फ एक सपना ! सपना कामयाबी का ! सपना शोहरत की ऊंचाईयों का |

जिन्दा रहने के लिए खाना चाहिए और खाने के लिए पैसे और पैसे कमाने के लिए Louis Vuitton कारीगरों और कलाकारों के साथ काम किया करता था | उसमे आमदनी तो सिर्फ इतनी होती थी की बस दो वक़्त की रोटी की व्यवस्था हो सके | लेकिन हुनर उसे वहाँ इतना मिला जिसके बलबूते उसने कई बिलियन डॉलर की एक कम्पनी खड़ी की |

Louis Vuitton का बचपन 

Louis Vuitton फ्रांस के Anchay नामक एक गाँव के गरीब परिवार में  4 अगस्त साल 1821 को पैदा हुए| इनके पिता एक किसान थे और माता जी टोपियाँ बनाने का काम करती थीं | ये वो दौर था जब फ्रांस नेपोलियन की लड़ाईयों के कारण हुए नुकसान से उबर रहा था | लड़ाईयों की वजह से सभी किसानों के हालात ख़राब हो चुके थे| Louis Vuitton का परिवार भी उन्ही किसानों में से एक था| इसलिए Louis Vuitton को बचपन से ही अपने पिता के साथ मजदूरी करनी पड़ती थी |

सुबह से शाम तक खेतों में काम किया करता था| जानवरों चराया करता था, लकड़ियाँ इकठ्ठा करता था | ये सारी चीजें कोई खास परेशानी की नहीं थी क्योंकि असली मुसीबत तो अभी आनी बाकी थी |

जब Louis Vuitton दस साल के हुए तो उनकी माताजी का स्वर्गवास हो गया| और उनके पिताजी ने दूसरा विवाह कर लिया | अब इसको आप इनकी बदकिस्मती कहो या खुशकिस्मती | पर इनकी सौतेली माँ ऐसी थी जैसी आप मूवी में कहानी देखते हैं | वो Louis Vuitton को न ठीक से खाना देती थी न ही चैन से रहने देती थी | उसने Louis Vuitton के जीवन को नर्क से भी बदतर बना दिया था |

Louis Vuitton ने ये सब कुछ समय तक तो सहा लेकिन जब सारी हदें पार हो गईं तो ये अपना ही घर छोड़ने पर मजबूर हो गए | और मात्र 13 साल की उम्र में अपना घर छोड़कर पेरिस पहुँच गए |

ये पेरिस तो पहुँच गए लेकिन इनकी जेब में न तो पैसे थे, न ही खाने के लिए कोई सामान | शुक्र इस बात की पेरिस में इनकी किस्मत इनके ऊपर तनिक मेहरबान हुई और उन्हें आर्टिस्ट और कारीगरों के पास जॉब मिल गई | और यहीं पर इन्होने मेटल, पत्थर, लकड़ी और कपड़ों का काम सीखते रहे | इस नौकरी में इन्हें केवल इतने पैसे मिल जाते थे की ये सिर्फ अपना पेट पाल सकें | लेकिन रहने के लिए छत का इंतजाम इनके लिए, अभी तक नहीं हुआ था |

ये अपनी रात एक कम्बल ओढ़कर खुले आसमां के नीचे लकड़ियों पर गुजारते थे लेकिन यहीं से उनका समय पलटने वाला था | दरअसल इसी समय इंडस्ट्रियल क्रांति के चलते पेरिस में ट्रेनों की शुरुवात हो चुकी थी | जिसके कारण यात्रा करना बहुत ही सरल हो चुका था | लोग ट्रेन का सफ़र दिल खोलकर कर रहे थे | लेकिन एक समस्या अभी भी बरक़रार थी वो थी सामान लेकर जाने की, क्योंकि ट्रेन में लोग कपड़े, फर्नीचर और पेंटिंग जैसे सामान लेकर जा रहे थे |

लोगों की ये प्रॉब्लम कारीगरों के लिए एक बड़ा अवसर था | कारीगरों ने लकड़ी के बड़े बड़े बॉक्स बनाना भी शुरू कर दिया | यहाँ Louis Vuitton को अपने लिए भी एक बड़ा मौका दिखाई देने लगा| ये कई प्रकार की कारीगरी का काम कर लेते थे जैसे मेटल, पत्थर,लकड़ी | और इन्हें तलाश थी तो सिर्फ मौके की और वो मौका इन्हें मिला MONSIEUR MARECHAL से !

Monsieur Marechal ने Louis Vuitton को अपनी दुकान पर कारीगर के रूप में नौकरी पर रख लिया | यहाँ पर भी इन्हें पैसे कुछ खास नहीं मिल रहे थे लेकिन वो कहते हैं न की हीरे को जब तक घिसा नहीं जायेगा वो चमकेगा कैसे ?

बस Louis Vuitton इस दुकान पर अपने हीरे चमकाने में लगे हुए थे | इनकी मेहनत ने रंग दिखाया और MONSIEUR MARECHAL के अधिकतर क्लाइंट्स के सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले बॉक्स मेकर बन गए |

अब उनका काम अच्छा चलने लग गया था | उनकी शोहरत दिनों दिन बढ़ती ही जा रही थी और बहुत जल्द ही वो इतने अधिक पोपुलर हो गए की फ्रांस की महारानी ने इन्हें अपना निजी बॉक्स मेकर बना लिया |

लेकिन मित्रों वो कहते हैं न अच्छे समय की बुरी बात ये होती है की वो बदलता जरूर है | और अभी Louis Vuitton का वक़्त अच्छा गुजर रहा था | दिन पर दिन और भी चर्चित होते जा रहे थे |

एक साल तक महारानी का निजी बॉक्स मेकर का काम करने के बाद Louis Vuitton ने अपनी खुद की शॉप खोलने का फैसला लिया | और इस तरह से शुरुवात हुई Louis Vuitton कम्पनी की जिसे आज हम LV के नाम से जानते हैं

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उस समय चमड़े के सिर्फ आयताकार बो बनाये जाते थे जिनका उपरी भाग वक्राकर होता था ताकि बॉक्स के ऊपर न ठहरे और बॉक्स को कोई नुकसान न पहुँचे लेकिन यहाँ समस्या जो थी की बॉक्स को एक के ऊपर एक नहीं रख सकते थे और उनके रख रखाव के ज्यादा जगह की जरुरत पड़ती थी |

इन दोनों परेशानियों को Louis Vuitton के विचार ने समाप्त कर दिया | Louis Vuitton का ये विचार बॉक्स इंडस्ट्री में किसी क्रांति से कम नहीं था| इन्होने चमड़े के बजाय कैनवास का प्रयोग करना शुरू किया जोकि लेदर की तुलना में टिकाऊ हल्का और सबसे ज्यादा वाटर प्रूफ था | इससे बॉक्स को रेगुलर आकार में बनाना शुरू कर दिया और अब इन बॉक्स को एक के ऊपर एक रखा जा सकता था| इसके साथ साथ ये बॉक्स दिखने में भी आकर्षक और मॉडर्न लगते थे |

Louis Vuitton के एक आईडिया ने उनका जीवन बदलकर रख दिया| और महज दो साल के भीतर ही Louis Vuitton के बैग लोगों के बीच आम हो चुके थे | अब Louis Vuitton ने बॉक्स से आगे बढ़कर हैण्ड बैग भी बनाने का फैसला लिया | उस समय के हैण्ड बैग लोगों के लिए किसी सर दर्द से कम नहीं थे | उन बैग्स को लोग सिर्फ मजबूरी में इस्तेमाल करते थे लेकिन Louis Vuitton को पूरा विश्वास था की वो कुछ बेहतरीन कर सकते हैं | इनके बैग लेदर के स्थान पर कैनवास के होते हैं और इन्होने इसी का फायदा उठाया| कैनवास पर नए और शानदार डिजाईन बनाना शुरू किया| इनके इस आईडिया से लोगों की सोच हैण्ड बैग को लेकर पूरी तरह से बदल गई|

और अब महिलाओं ने अपने कपड़ों को हैण्ड बैग के साथ मैच कराना शुरू कर दिया | सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन Louis Vuitton को अब भी कुछ नया करना बचा था | और उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था, उस समय इन्होने अपने बेटे Georges Vuitton की मदद मांगी| पिता की तरह ही बेटे का आईडिया भी किसी चमत्कार से कम नहीं था | Georges Vuitton ने बैग पर लॉक लगाने का आईडिया अपने पिता को दिया| क्योंकि उस वक़्त बैग पर लॉक नहीं हुआ करते थे |

Georges Vuitton ने लॉक के साथ बैग पर पैटर्न बना दिया और बैग बिलकुल एक खजाने के तरह लगने लगा था| इसके साथ ही बैग की हिफाजत भी बढ़ चुकी थी | फिर से एक बार Louis Vuitton के बैग की मांग ऊंचाईयों को छूने लगी थी |

लेकिन हमेशा समय अच्छा नहीं रहता| तभी Franco Prussian War के चलते Louis Vuitton का काम बंद पड़ गया| न सिर्फ काम बंद पड़ा बल्कि इन्हें अपने घर को छोड़कर वापस शहर जाना पड़ा | Louis Vuitton फिर से एक बार बेघर हो चुके थे लेकिन इस बार वो अकेले नहीं थे | इस बार इनका परिवार भी इनके साथ था |

बाकी शरणार्थियों के साथ ही ये एक बेहद ही तंग जगह पर रहने लगे | जहाँ पर इन्हें और इनके परिवार को खाना भी ठीक से नहीं मिल पा रहा था | जब युद्ध समाप्त हो गया तो ये फिर से अपने परिवार के साथ अपने घर आ गए | लेकिन तब तक इनके घर का हर एक सामान चोर उठा ले गए थे और वर्कशॉप पूरी तरह से नष्ट हो गई थी |

Louis Vuitton ने अपने बचाए पैसों से अपनी वर्कशॉप को ठीक किया और दुकान के लिए एक नए स्थान की खोज में लग गए | युद्ध के कारण प्रॉपर्टी के दाम कभी लुढ़क चुके थे जिससे की Louis Vuitton को दुकान शहर के भीतर काफी अच्छे दाम में मिल गई | और दुकान खोलने के महज 6 महीने के भीतर ही Louis Vuitton का काम फिर से पहले की तरह पटरी पर आ गया |

लेकिन इन्हें अपने काम को सिर्फ पटरी पर ही नहीं लाना था बल्कि काम को तेज़ी से चलाना भी था | इसीलिए Louis Vuitton ने तकनीकी का प्रयोग करने के बारे में सोचा | और अपने बैग्स पैटर्न प्रिंट करना शुरू कर दिया | और इसी वजह से ये अपने प्रतियोगियों को काफी पीछे छोड़ दिए|

इनके इस नए और बेहतरीन पैटर्न प्रिंटिंग ने बाजार में धूम मचा दिया| अब Louis Vuitton के पास न सिर्फ अपने देश से बल्कि विदेशों से भी आर्डर आने लगे थे | अपने बैग्स की बढ़ती डिमांड को देखकर Louis Vuitton ने अपना एक शोरूम लन्दन में भी खोल दिया | और इसी के साथ शुरुवात हुई Louis Vuitton ब्रांड के पूरी दुनिया में विस्तार की |

उस दौर में Louis Vuitton अकेले एक ऐसे डिज़ाइनर थे जिनके प्रोडक्ट अपने देश से लेकर विदेशी अमीरों के घरों में पाए जाते थे | इसलिए Louis Vuitton ने अपनी कम्पनी का सामान खरीदना आसान करने के लिए, कंपनी का कैटलॉग जारी करने के बारे में विचार किया |

लेकिन इसी साल इनका निधन हो गया | जब ये दुनिया को अलविदा बोले तब इनकी उम्र 72 वर्ष थी | और आज तक इनके मरने का कारण किसी को पता नहीं चल सका है | इनकी मृत्यु के बाद इनके बेटे Georges Vuitton ने कम्पनी को संभाल लिया | और Georges Vuitton ने अपने पिता की याद में LV का मोनोग्राम जारी किया जिसे आज हम सभी देखते हैं |

Georges Vuitton तो इस दुनिया को छोड़कर चले गए लेकिन उनकी बनाई कम्पनी आज लक्ज़री फैशन के फेहरिस्त में पहले स्थान पर आती है | जिसकी मार्केट वैल्यू बाईस लाख करोड़ से भी अधिक हो चुकी है |

इस आर्टिकल को अपना ढेर सारा प्यार दीजिये और इसे अभी अपने प्यारे दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जरुर शेयर कर दें | आपका हर पल खुशियों से भरा हो यही हमारी शुभकामना है | थैंक्यू आप सभी प्रिय पाठकों का , एक और बेहतरीन दिन !

 

 

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